ACB जांच में घिरे पूर्व अधिकारी, संपत्ति और आय के बीच मिला बड़ा अंतर

कोडरमा। कोडरमा-रांची रेल परियोजना के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि के आवंटन में भारी धांधली और लाभार्थियों से मोटी दलाली वसूलने के मामले में कोडरमा के तत्कालीन जिला भू-अर्जन अधिकारी शारदानंद देव के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन अधिकारी पर विस्थापितों को मुआवजा बांटने के एवज में 10 से लेकर 25 फीसदी तक का फिक्स कमीशन लेने का गंभीर आरोप है। एसीबी ने अंदेशा जताया है कि इस काली कमाई के जरिए बड़े पैमाने पर आय से अधिक संपत्ति बनाई गई है। वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, 1 मार्च 2014 से 31 जनवरी 2016 के बीच अधिकारी की वैध स्रोतों से कुल कमाई महज 16.47 लाख रुपये थी, जबकि इसी दौरान उनका कुल खर्च और निवेश बढ़कर 90.27 लाख रुपये तक पहुंच गया, जो उनकी वास्तविक आय के मुकाबले बेहद ज्यादा है।
पीड़ित महिला की शिकायत पर खुला फर्जीवाड़े का खेल
इस पूरे भ्रष्टाचार की कहानी साल 2017 में तब शुरू हुई, जब रेल परियोजना में जमीन गंवाने वाले ग्रामीणों ने मुआवजा वितरण में धांधली की लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद एसीबी ने प्राथमिक जांच दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। तफ्तीश के दौरान कुश्मा देवी नामक एक पीड़ित ग्रामीण महिला ने चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए बताया कि उसे मुआवजे की राशि आवंटित करने के बाद, विभाग के लोगों ने बैंक में खाता खुलवाने का झांसा देकर उससे कई कोरे दस्तावेजों और कागजातों पर दस्तखत करवा लिए थे। बाद में शातिर तरीके से उसके बैंक खाते से एक बड़ी रकम गायब कर दी गई।
परिजनों के बैंक खातों में लाखों का लेन-देन और जमीन की खरीद
एसीबी की वित्तीय जांच में यह बात सामने आई है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान शारदानंद देव, उनकी पत्नी सुधा देव, कथित पत्नी सुमित्रा देवी सहित अन्य करीबियों के बैंक खातों में 54 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध नकदी जमा कराई गई थी। केवल बैंक लेन-देन ही नहीं, बल्कि इसी समयावधि में इस सिंडिकेट द्वारा परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर करीब 20.76 लाख रुपये मूल्य की बेनामी जमीनें भी खरीदी गईं। इसके अलावा आरोपी अधिकारी की पुत्री स्मिता देव के नाम पर भी कई भूखंडों की रजिस्ट्री कराए जाने के पुख्ता प्रमाण जांच टीम के हाथ लगे हैं।
चास में आलीशान तीन मंजिला इमारत और आगामी कानूनी शिकंजा
भ्रष्टाचार की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच टीम जब बोकारो के चास इलाके में पहुंची, तो वहां आरोपी अधिकारी का एक आलीशान तीन मंजिला मकान मिला, जिसे बनाने में शुरुआती अनुमान के मुताबिक लगभग 75 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अब इस अवैध कमीशनखोरी, अकूत अचल संपत्ति और संदिग्ध बैंक लेन-देन के तमाम साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है। जांच एजेंसी का कहना है कि तमाम सबूतों का मिलान अंतिम दौर में है और जल्द ही इस मामले में संलिप्त तत्कालीन अधिकारी और उनके मददगारों पर गिरफ्तारी सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
