बांग्लादेशी सेना में बदली ताकत की तस्वीर, तारिक रहमान ने आर्मी चीफ को दिया झटका

ढाका। बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बाद अब देश की सेना के भीतर भी बड़े पैमाने पर बदलाव और भूचाल आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में सेना की ओर से जारी कुछ प्रतिबंधित पोस्टिंग ऑर्डर्स ने ढाका के सैन्य हलकों में सनसनी फैला दी है। इन बड़े प्रशासनिक बदलावों के केंद्र में देश की बेहद संवेदनशील 46वीं स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड और कई अन्य प्रमुख सैन्य कमानें शामिल हैं, जिससे सैन्य गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं कि क्या यह फेरबदल सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान की शक्तियों और उनके ऑपरेशनल प्रभाव को धीरे-धीरे सीमित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
सैन्य तबादलों के पीछे रणनीतिक बदलाव
अंदरखाने से सामने आ रही खबरों के मुताबिक, इन अहम तबादलों के पीछे के असली रणनीतिकार कोई और बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) एकेएम शमसुद्दीन इस्लाम इन पोस्टिंग के मुख्य वास्तुकार हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री तारिक रहमान का पूरा समर्थन प्राप्त है। पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार को रक्षा मंत्रालय के साथ-साथ आर्म्ड फोर्सेस डिवीजन की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने के बाद से उनका प्रशासनिक कद काफी बढ़ गया है, जिसका असर अब सिविल-मिलिट्री चेन और कमान व्यवस्था में साफ तौर पर देखा जा सकता है।
46वीं इंडिपेंडेंट इन्फैंट्री ब्रिगेड में बड़ा बदलाव
इन तमाम फेरबदलों में सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव 46वीं इंडिपेंडेंट इन्फैंट्री ब्रिगेड में देखने को मिला है। यह ब्रिगेड सीधे तौर पर आर्मी हेडक्वार्टर के अधीन रहकर काम करती है और राजधानी ढाका की सुरक्षा तथा रणनीतिक व्यवस्था में इसकी भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। मिलिट्री ट्रेनिंग डायरेक्टर के पद पर रहे ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हुमायूं कबीर को अब इस महत्वपूर्ण ब्रिगेड की कमान सौंप दी गई है। चूंकि यह पद सामान्य प्रशासनिक जिम्मेदारी से कहीं अधिक संवेदनशील है, इसलिए इस बड़े बदलाव ने मिलिट्री गलियारों में गहरी सुगबुगाहट पैदा कर दी है।
कमांड आर्किटेक्चर में नए समीकरण
इसके अलावा, मीरपुर स्थित छठी इंडिपेंडेंट एयर डिफेंस ब्रिगेड और 33वीं इन्फैंट्री डिवीजन के बीच भी वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। इन लगातार हो रहे तबादलों और कमांड में बदलाव के कारण पूरे सैन्य ढांचे में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं, जिससे देश के रक्षा हलकों में भविष्य की रणनीतिक हलचल को लेकर कयासों का बाजार गर्म है।
