‘डायन’ के शक में मासूम की हत्या, पलामू में चाचा ने भतीजे पर किया चाकू से हमला

पलामू: 21वीं सदी में भी समाज को खोखला कर रहा अंधविश्वास किस कदर इंसानों को हैवान बना देता है, इसकी एक बेहद डरावनी और रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात झारखंड के पलामू जिले से सामने आई है। जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले चैनपुर थाना क्षेत्र के रबदा गांव में सोमवार की अलसुबह एक कलयुगी चाचा ने तंत्र-मंत्र और ओझा-गुणी के झूठे जाल में फंसकर अपने ही सगे 12 वर्षीय मासूम भतीजे की चाकू मारकर निर्मम हत्या कर दी।

इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड के बाद पूरे गांव में हाहाकार मच गया है। हालांकि, घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों की मुस्तैदी और सूचना पर हरकत में आई चैनपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्यारे चाचा को मौके से ही धर दबोचा। मासूम बच्चे की इस तरह बेरहमी से की गई हत्या के बाद पूरे इलाके में भारी जन-आक्रोश और तनाव का माहौल देखा जा रहा है।

सुबह घर के बाहर खेल रहा था रौशन; अचानक पहुंचे दरिंदे ने पहले सीने में घोंपा चाकू, फिर दबाया गला

इस वीभत्स और जघन्य हत्याकांड को लेकर पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों ने जो विवरण दिया है, वह किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर कर रख देने वाला है। प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार:

  • सूनेपन का उठाया फायदा: मृतक बच्चे की पहचान 12 वर्षीय रौशन बैठा के रूप में हुई है, जो सोमवार की सुबह अपने घर के ठीक बाहर खेल रहा था। इसी दौरान उसका सगा चाचा अनिल बैठा (आरोपी) हाथ में धारदार चाकू छिपाकर बेहद चुपके से उसके पास पहुंचा।

  • बर्बरता की हदें पार: इससे पहले कि मासूम रौशन कुछ समझ पाता या अपनी रक्षा के लिए शोर मचा पाता, हत्यारे अनिल ने उस पर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला कर दिया। चाकू के वार से जब बच्चा लहुलूहान होकर जमीन पर गिर पड़ा और तड़पने लगा, तो आरोपी का दिल फिर भी नहीं पसीजा। उसने मासूम का गला तब तक दबाए रखा, जब तक कि उसके शरीर की पूरी हरकत बंद नहीं हो गई और उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत नहीं हो गई। वारदात को अंजाम देकर आरोपी भागने की फिराक में था, लेकिन ग्रामीणों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया।

संतान न होने का था मलाल; बच्चे की मां को डायन समझकर करता था नफरत

इस खूनी वारदात के पीछे की जो असली और मुख्य वजह सामने आई है, उसने समाज के पढ़े-लिखे होने के दावों की पोल खोलकर रख दी है। चैनपुर थाना प्रभारी लालजी ने बताया कि आरोपी अनिल बैठा से की गई शुरुआती पूछताछ और प्राथमिक जांच में यह पूरा मामला पूरी तरह से घोर अंधविश्वास और आपसी रंजिश से जुड़ा हुआ पाया गया है:

  • गर्भ में बच्चों की मौत का भ्रम: आरोपी अनिल बैठा की शादी को कई साल बीत चुके थे, लेकिन उसके घर में कोई संतान नहीं थी। उसकी पत्नी जब भी गर्भवती होती थी, तो किसी न किसी वजह से गर्भ में ही बच्चे की मौत हो जाती थी। इस बात को लेकर वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो चुका था।

  • भाभी पर था तांत्रिक क्रिया का शक: किसी ओझा या तांत्रिक के बहकावे में आकर आरोपी को यह गहरा भ्रम (वहम) हो गया था कि उसकी भाभी (मृतक रौशन की मां) कोई टोना-टोटका या तांत्रिक क्रिया करती है। उसे लगता था कि उसकी भाभी के जादू-टोने के कारण ही उसके वंश का नाश हो रहा है और उसके घर बच्चा पैदा नहीं हो पा रहा है। इसी अंधविश्वास और नफरत की आग में जलते हुए उसने अपनी भाभी को जिंदगी भर का दर्द देने के लिए उसके मासूम बेटे रौशन को ही रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।

मजदूर पिता के आने की जिद पर अड़े ग्रामीण; एसडीपीओ ने सूझबूझ से शांत कराया गुस्सा

हत्याकांड की खबर जैसे ही गांव में फैली, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। इस बीच जब पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने लगी, तो ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस का कड़ा विरोध करते हुए रास्ता जाम कर दिया। ग्रामीणों का तर्क था कि मृतक रौशन के पिता जीविकोपार्जन के लिए राज्य से बाहर दूसरे शहर में मजदूरी करते हैं, इसलिए जब तक बेबस पिता अपने लाडले के अंतिम दर्शन के लिए गांव नहीं पहुंच जाता, तब तक शव को गांव से बाहर नहीं ले जाने दिया जाएगा।

गांव में बिगड़ते हालात और तनाव को देखते हुए सदर एसडीपीओ (SDPO) राजेश कुमार यादव भारी पुलिस बल और अतिरिक्त कमांडो दस्ते के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित ग्रामीणों और रोते-बिलखते परिजनों को कानून का हवाला देते हुए बेहद संवेदनशीलता के साथ समझाया कि कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमॉर्टम में हो रही देरी से केस कमजोर हो सकता है। अधिकारियों की सूझबूझ और काफी मशक्कत के बाद ग्रामीण शांत हुए, जिसके बाद शव को मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा जा सका।

अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील; परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, कड़ी सजा की मांग

इस दुखद घटना के बाद पूरे रबदा गांव के चूल्हे नहीं जले हैं और चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। अस्पताल के मर्च्युरी (शवगृह) परिसर में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार एकत्रित हो गए, जिसके कारण एहतियात के तौर पर अस्पताल परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील करना पड़ा। अस्पताल के भीतर मृतक मासूम की मां और अन्य महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था, जो बार-बार बेहोश हो रही थीं।

पलामू पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपी अनिल बैठा के खिलाफ हत्या (धारा 103) और अंधविश्वास निवारण अधिनियम की कड़े प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस की एक विशेष फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून से सना चाकू और अन्य साक्ष्य एकत्र कर लिए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में इतनी पुख्ता चार्जशीट तैयार करेंगे कि आरोपी चाचा को अदालत से फांसी या उम्रकैद की सख्त से सख्त सजा मिले, ताकि समाज में अंधविश्वास फैलाने वाले ऐसे अपराधियों को कड़ा सबक मिल सके।

Leave a Reply