ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर, ट्रंप को लेकर ईरान की धमकी से मचा हड़कंप

तेहरान/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव गहराने के साथ ही अब दोनों देशों के बीच मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक जंग भी चरम पर पहुंच गई है। दोनों ओर से लगातार हो रहे हमलों के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में एक बेहद विवादित और आक्रामक बिलबोर्ड लगाया गया है। इस विशाल बिलबोर्ड में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक काले ताबूत में मृत दिखाया गया है, जिस पर अंग्रेजी और फारसी भाषाओं में सीधे तौर पर 'हम ट्रंप को मारेंगे' (We will kill Trump) लिखा हुआ है।

इस आक्रामक कदम ने दोनों देशों के बीच पहले से ही बेहद तनावपूर्ण बने हालातों में आग में घी डालने का काम किया है।

एंगेलाब चौराहे पर लगा 'ताबूत वाला' विवादित बिलबोर्ड

यह भड़काऊ बिलबोर्ड राजधानी तेहरान के मध्य में स्थित सबसे व्यस्त और मशहूर एंगेलाब चौराहे (Engelab Square) पर लगाया गया है।

इस बिलबोर्ड के दृश्यों को बेहद आक्रामक तरीके से तैयार किया गया है:

  • चित्रण: बिलबोर्ड पर डोनाल्ड ट्रंप की आंखें और मुंह पूरी तरह बंद दिखाए गए हैं।

  • पोशाक व मुद्रा: ट्रंप अपनी चिर-परिचित लाल टाई पहने हुए हैं, उनके हाथ छाती के ऊपर मुड़े हुए हैं और पैर हवा में दिखाई दे रहे हैं।

  • ताबूत: उन्हें एक काले रंग के ताबूत में लेटा हुआ दर्शाया गया है।

  • धमकी: ताबूत के ठीक नीचे उन्हें जान से मारने की खुली चेतावनी लिखी गई है। साथ ही इस पर 'मिनाब की याद में' भी अंकित है, जो किसी हालिया घटना या सैन्य कार्रवाई की ओर इशारा करता है।

ईरान में पहले भी गूंजते रहे हैं ट्रंप विरोधी नारे

यह पहला मौका नहीं है जब ईरान की धरती से अमेरिकी नेतृत्व, खासकर डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने या उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गई हों। 28 फरवरी से पहले भी ईरान के कई हिस्सों और रैलियों में 'डेथ टू अमरीका' (अमेरिका मुर्दाबाद) और 'डेथ टू ट्रंप' के हिंसक नारे आम रहे हैं।

हाल ही में ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान भी भारी जनसमूह ने सड़कों पर उतरकर अमेरिका और ट्रंप के खिलाफ इसी तरह की उग्र नारेबाजी की थी।

मनोवैज्ञानिक युद्ध और सैन्य तनाव चरम पर

रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान के सार्वजनिक स्थल पर इस तरह के बिलबोर्ड का लगाया जाना केवल एक धमकी नहीं, बल्कि ईरान द्वारा अपने नागरिकों को लामबंद करने और अमेरिका को कड़ा संदेश देने का एक मनोवैज्ञानिक हथकंडा है। दोनों देशों के बीच जारी सैन्य हमलों के दौर में इस तरह के भड़काऊ प्रदर्शनों से कूटनीतिक स्तर पर बातचीत या शांति के रास्ते लगभग बंद होते दिख रहे हैं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की विभीषिका और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।

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