‘समाजवादी विचारधारा से निकले नेता का संघ के साथ जाना दुखद’, खरगे ने नीतीश पर कसा तंज

पटना। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने श्री बाबू को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार में लोकतंत्र की नींव को सुदृढ़ बनाने और सामाजिक विषमता को मिटाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। खरगे ने कहा कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने जमींदारी प्रथा का उन्मूलन कर समाज के पीड़ित, शोषित और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए, जिससे राज्य में सामाजिक न्याय का एक नया युग प्रारंभ हुआ। बिहार की पावन धरती को लोकतंत्र की जननी बताते हुए उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में निमंत्रित करने के लिए आयोजकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
बिहार में कांग्रेस की ऐतिहासिक सरकारों का किया उल्लेख
अपने संबोधन के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने बिहार में कांग्रेस सरकारों के स्वर्णिम इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 1937 में ब्रिटिश हुकूमत के दौर में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में पहली सरकार का गठन हुआ था, जिन्हें उस समय 'प्रीमियर' कहा जाता था। इसके पश्चात वर्ष 1947 में स्वतंत्र भारत की दूसरी सरकार का गठन हुआ। स्वतंत्र भारत के प्रथम आम चुनावों के बाद भारतीय संविधान के अंतर्गत श्री बाबू 3 जनवरी 1961 तक निरंतर बिहार के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे और राज्य के सर्वांगीण विकास में योगदान दिया।
विचारधारा और राजनीतिक विरोधियों पर तीखे प्रहार
आयोजन में खरगे ने विपक्षी राजनीतिक विचारधारा पर हमला बोलते हुए कहा कि जब तक समाज में विघटनकारी सोच प्रभावी रहेगी, तब तक स्थायी शांति स्थापित होना कठिन है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी दल देश के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और विभूतियों जैसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ऐतिहासिक विरासत को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। खरगे ने नीतीश कुमार जैसे वरिष्ठ नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि समाजवादी पृष्ठभूमि के नेता भी उन ताकतों के साथ चले गए जिनकी विचारधारा सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करती है।
जनता से आंदोलन का आह्वान और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने देश की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति को लेकर आम जनता से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा अभियान एक तरह से स्वतंत्रता का दूसरा संग्राम है, जिसमें बिहार की जनता को अग्रणी भूमिका निभानी होगी। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व में हुई कथित जांच की घोषणाओं और विपक्षी नेताओं पर दर्ज दर्ज मामलों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए निष्पक्षता की मांग की।
