कौन थीं शिवानी शर्मा, जिनके अंगदान से तीन लोगों को मिली नई जिंदगी? पीएम मोदी ने किया जिक्र

नर्मदापुरम। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 139वें एपिसोड के माध्यम से मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की रहने वाली दिवंगत शिवानी शर्मा और उनके परिजनों के अनुकरणीय साहस व मानवता की खुले दिल से प्रशंसा की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भीषण सड़क हादसे में अपनी बेटी को खो देने के बाद भी शोकाकुल परिवार द्वारा लिया गया अंगदान का यह निर्णय न केवल पूरे समाज के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि कठिन समय में भी इंसानियत की मिसाल कैसे कायम की जाती है।

सलकनपुर दर्शन के दौरान हुआ था गंभीर सड़क हादसा

नर्मदापुरम जिले के बनखेड़ी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले खापा खुर्द गांव की निवासी शिवानी शर्मा अपने परिवार के साथ बीते 10 अक्टूबर को प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सलकनपुर स्थित विजयासन देवी मंदिर में दर्शन के लिए जा रही थीं। उसी यात्रा के दौरान वे एक अत्यंत भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गईं, जिसमें उनके सिर पर अत्यंत गंभीर चोटें आईं। परिजनों ने उन्हें तुरंत इलाज के लिए भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए।

ब्रेन-स्टेम डेड घोषित होने के बाद परिवार ने लिया बड़ा फैसला

अस्पताल में उपचार के दौरान 14 अक्टूबर को चिकित्सकों ने शिवानी को ब्रेन-स्टेम डेड घोषित कर दिया, जिसका तात्पर्य यह था कि उनके मस्तिष्क की कार्यप्रणाली स्थाई रूप से बंद हो चुकी थी और उनके जीवित बचने की कोई संभावना शेष नहीं थी। इस दुखद समाचार से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। हालांकि, इस असहनीय और भारी पीड़ा के क्षण में भी परिजनों ने अत्यंत परिपक्वता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए मृतका के अंगों को दान करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिसने अन्य गंभीर मरीजों के जीवन की राह आसान कर दी।

अंगदान से तीन जरूरतमंदों को मिला नया जीवनदान

परिजनों की सहमति मिलने के उपरांत चिकित्सकीय प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए शिवानी का लिवर और दोनों किडनी सफलतापूर्वक निकाली गईं। इन अमूल्य अंगों का प्रत्यारोपण तीन अलग-अलग जरूरतमंद मरीजों में किया गया, जिससे उन्हें नया जीवन प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि शोकाकुल परिवार का यह कदम चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है और यह समाज को अंगदान के प्रति जागरूक करने का एक बड़ा माध्यम बनता है।

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