झारखंड कैबिनेट के बड़े फैसले, प्रॉपर्टी खरीदने की बढ़ेगी लागत; छात्रों को मिलेगी डिजिटल हेल्थ आईडी

राँची। झारखंड के शहरी इलाकों में अब जमीन और मकान की खरीद-बिक्री करना पहले की तुलना में अधिक महंगा होने जा रहा है। राज्य कैबिनेट ने 'झारखंड नगरपालिका भूमि/भवन स्थानांतरण अधिभार नियमावली, 2026' को अपनी औपचारिक स्वीकृति दे दी है, जिसके अंतर्गत संपत्ति के हस्तांतरण पर देय कुल स्टाम्प शुल्क और निबंधन शुल्क पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त अधिभार वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में 'हेल्थ एंड वेल बीइंग यूनिट' की स्थापना, विद्यार्थियों के लिए डिजिटल हेल्थ आईडी कार्ड जारी करने, पॉलीटेक्निक छात्रों के लिए विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम तथा स्वास्थ्य ढांचे के सुदृढ़ीकरण से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

शहरी संपत्ति की रजिस्ट्री पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त अधिभार का प्रावधान

स्वीकृत नई नियमावली के अनुसार, संपत्ति स्थानांतरण पर अतिरिक्त अधिभार लगाने का यह फैसला राज्य के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों, नगर पंचायतों और अधिसूचित औद्योगिक नगरियों पर एक समान रूप से प्रभावी होगा। इसके तहत यदि किसी संपत्ति की रजिस्ट्री में स्टाम्प और निबंधन शुल्क मिलाकर एक लाख रुपये का खर्च आता है, तो खरीदार को 10 हजार रुपये का अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा। यह अधिभार निबंधन की प्रक्रिया पूर्ण होने से ठीक पूर्व संबंधित निबंधन अधिकारी द्वारा डिजिटल माध्यम से वसूल किया जाएगा। यदि किसी कारणवश रजिस्ट्री रद्द होती है, तो यह राशि वापस कर दी जाएगी। इस व्यवस्था से प्राप्त होने वाला राजस्व सीधे संबंधित स्थानीय निकाय के विशेष खाते में जमा होगा, जिसका उपयोग क्षेत्र के बुनियादी और पूंजीगत विकास कार्यों में किया जाएगा। यदि राज्य सरकार किसी मामले में स्टाम्प शुल्क माफ करती है तो यह अधिभार भी स्वतः शून्य हो जाएगा।

विद्यार्थियों के लिए डिजिटल हेल्थ आईडी और पॉलीटेक्निक इंटर्नशिप योजना

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने सभी राजकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 'हेल्थ एंड वेल बीइंग यूनिट' गठित करने का निर्णय लिया है। इसके संचालन हेतु प्रत्येक विश्वविद्यालय को अपने कुल वार्षिक बजट का दो प्रतिशत हिस्सा आरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इन इकाइयों के माध्यम से छात्रों को प्राथमिक चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, सभी विद्यार्थियों की एक विशेष डिजिटल हेल्थ आईडी तैयार की जाएगी, जिससे उनकी मेडिकल हिस्ट्री सुरक्षित रखी जा सके। इसके अलावा राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थियों को व्यावहारिक औद्योगिक प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से रांची, दुमका और रामगढ़ स्थित टूल रूम के सहयोग से समर एवं सेमेस्टर इंटर्नशिप कराने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई है।

प्रशासनिक सुधार, विशेषज्ञ समिति और थानों में सीसीटीवी हेतु बजट

राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक कुशल बनाने के लिए 'झारखंड विशेषज्ञ समिति के गठन एवं कार्यप्रणाली नियमावली, 2026' को मंजूरी प्रदान की गई है, जिससे सरकारी विभाग जटिल नीतिगत व तकनीकी मामलों में देश-विदेश के विशेषज्ञों का परामर्श ले सकेंगे। साथ ही आपराधिक न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए 'राज्य प्रोबेशन सेवा नियमावली, 2026' के गठन को भी हरी झंडी दी गई है। राज्य के सभी पुलिस थानों में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित सीसीटीवी कैमरों से संबद्ध परामर्शदाता फर्म के बकाया भुगतान हेतु 1.17 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में 829 करोड़ की बड़ी सौगात और मेडिकोसिटी परियोजना

राज्य में स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूती देने के लिए जमशेदपुर स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमजीएम) में 500 बेड क्षमता वाले नए आधुनिक अस्पताल भवन निर्माण के लिए 545 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई है, जिससे कोल्हान प्रमंडल के नागरिकों को उच्च स्तरीय इलाज सुविधा मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त, राज्य में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने और सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु 'झारखंड मेडिकोसिटी' की स्थापना के लिए 284 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इस महत्वाकांक्षी मेडिकोसिटी परियोजना के अंतर्गत भविष्य में कुल पांच हजार बेड की विशाल चिकित्सा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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