आसाराम की पैरोल पर नया पेच, जेल से रिहाई न होने पर राजस्थान सरकार से जवाब

जोधपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पैरोल मंजूर किए जाने के बावजूद जेल प्रशासन द्वारा आसाराम को अभी तक रिहा नहीं किए जाने का मामला तूल पकड़ चुका है। आदेश के बाद भी रिहाई न होने पर आसाराम की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में गुहार लगाई गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में हुई सुनवाई
इस मामले की सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से कड़ा जवाब मांगते हुए यह स्पष्ट करने को कहा है कि जब हाईकोर्ट ने विधिवत रूप से पैरोल मंजूर कर दी थी, तो कैदी को जेल से बाहर क्यों नहीं छोड़ा गया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख तय की है।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी अंतरिम जमानत की अर्जी
इससे पहले गत 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की खराब सेहत के आधार पर दायर की गई अंतरिम जमानत की याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने याचिका को लंबित रखते हुए यह छूट दी थी कि तबीयत अधिक बिगड़ने पर दोबारा राहत के लिए आवेदन किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की पैरवी करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि आसाराम ने हाईकोर्ट से पैरोल हासिल करते समय सुप्रीम कोर्ट में चल रही अंतरिम जमानत की बात छिपाई थी।
एम्स की मेडिकल रिपोर्ट और कोर्ट का निर्देश
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति की असलियत जानने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट तलब की थी। एम्स की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, हालांकि उनके स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने की जरूरत है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित केयरगिवर साथ रखने की अनुमति दी है। साथ ही, तथ्य छुपाए जाने की बात सामने आने पर बेंच ने नाराजगी भी व्यक्त की है।
