चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राउत के सवाल, दो आयुक्तों की आपत्तियों का दिया हवाला

ठाणे। निर्वाचन आयोग के भीतर कथित आंतरिक मतभेदों से संबंधित प्रकरण सामने आने के पश्चात शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कड़ा प्रहार किया है। संवाददाताओं को संबोधित करते हुए संजय राउत ने अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी का उल्लेख करते हुए कहा कि देश उनका आभारी रहेगा कि इस विषय के उजागर होने से विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे प्रश्नों व आशंकाओं की पुष्टि हुई है।
संजय राउत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के रुख के कारण ही यह विषय सार्वजनिक हो सका है। इसके साथ ही उन्होंने निर्वाचन आयोग की वर्तमान कार्यप्रणाली पर अत्यंत तीक्ष्ण कटाक्ष भी किया।
10 माह की अवधि में 14 आपत्तियों का संदर्भ
संजय राउत का यह वक्तव्य उन मीडिया रिपोर्टों के पश्चात आया है, जिनमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी ने विगत 10 महीनों में आयोग के कतिपय निर्णयों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार अपनी असहमति या आपत्तियां दर्ज कराईं। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नामों के विलोपन व पुनर्बहाली, फॉर्म-6 की प्रक्रिया तथा चुनावी डेटाबेस की पहुंच जैसे महत्वपूर्ण विषय सम्मिलित बताए गए हैं।
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने आरोप लगाया कि दोनों चुनाव आयुक्तों की तकनीकी व प्रक्रियात्मक आपत्तियों की उपेक्षा की गई। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने आंतरिक मतभेद के इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था में भिन्न-भिन्न विचार, तकनीकी सुझाव और असहमति की टिप्पणियां सामान्य निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा होती हैं। आयोग के अनुसार, उसके सभी अंतिम निर्णय विधि और स्थापित नियमों के अनुरूप ही लिए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर कानूनी कार्रवाई की मांग
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी संजय राउत ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने मांग की थी कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर न्यायिक हिरासत में भेजा जाए।
