SC ने रद्द किए 150 अवैध दाखिले, हर छात्र को मिलेगा 10 लाख मुआवजा

नई दिल्ली। दाखिला को लेकर लखनऊ का एक और मेडिकल कॉलेज सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर आ गया है। शीर्ष अदालत ने 2017-18 के शैक्षणिक सत्र में दाखिले पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी जीसीआरजी मेमोरियल ट्रस्ट मेडिकल कॉलेज ने हाई कोर्ट से अनुमति ले ली और दाखिला शुरू कर दिया। इस कॉलेज में एमबीबीएस की कुल 150 सीटें हैं और अभी तक करीब 11 छात्रों ने दाखिला लिया है।

 

शीर्ष अदालत ने गुरुवार को सभी छात्रों का दाखिला रद कर दिया। मेडिकल कॉलेज से हर छात्र को 10-10 लाख रुपये और ली गई फीस वापस करने को कहा है। इसके साथ ही कॉलेज पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

 

कॉलेज से आठ सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जुर्माना जमा कराने को कहा है। शीर्ष अदालत ने न्यायिक अनुशासन की अनदेखी कर आदेश देने पर हाई कोर्ट को भी आड़े हाथों लिया है। खामियां पाने के बाद एमसीआइ ने मेडिकल कॉलेज को शैक्षणिक सत्र चलाने की अनुमति नहीं दी थी।

 

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ का यह आदेश न्यायिक अनुशासन की अनदेखी करने वाली अदालतों और मन माफिक आदेश के लिए अदालतों का चक्कर लगाने वाले संस्थानों के लिए एक नसीहत है।

 

हाई कोर्ट के रवैये पर आपत्ति जताते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि आदेश पारित करने से पहले मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआइ) और केंद्र सरकार को पक्ष रखने की इजाजत नहीं दी। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश अनुचित, गलत और बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। हाई कोर्ट ने न्यायिक शुचिता और अनुशासन का ध्यान नहीं रखा।

 

यह मामला भी लखनऊ के प्रसाद एजूकेशन ट्रस्ट के मामले जैसा है। जीसीआजी मैमेरियल ट्रस्ट ने पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की इसके बाद यह कहते हुए वापस लिया कि वह हाई कोर्ट जाना चाहता है। शीर्ष अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में 2017-18 के शैक्षणिक सत्र पर रोक लगाई थी। लेकिन अगले ही दिन मेडिकल कॉलेज ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। एमसीआइ ने आरोप लगाया था कि हाई कोर्ट ने उसे और केंद्र सरकार को याचिका का जवाब देने की अनुमति नहीं दी और एक सितंबर को कॉलेज को दाखिला शुरू करने की इजाजत दे दी।

 

मालूम हो कि प्रसाद एजूकेशन ट्रस्ट मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। हालांकि उसमें न्यायाधीशों के नाम पर रिश्वतखोरी के आरोप में सीबीआइ ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने उड़ीसा हाई कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश को भी आरोपी बनाया है। इस मामले की आंच सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंची थी।

Leave a Reply