टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने लिया संन्यास, लिखा- देश के लिए खेलना सबसे बड़ा सम्मान

भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत, भरोसेमंद और जुझारू खिलाड़ियों में शुमार अजिंक्य रहाणे ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों को अलविदा कहने की घोषणा कर दी है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक भावुक वीडियो में उन्होंने अपने दो दशक लंबे सफर को याद करते हुए कहा कि उनके लिए हमेशा देश और टीम सर्वोपरि रहे हैं। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले इस दिग्गज खिलाड़ी के संन्यास से करोड़ों फैंस मायूस हैं।
'हर शुरुआत का एक अंत होता है'
संन्यास का ऐलान करते हुए अजिंक्य रहाणे ने कहा, 'जिंदगी की सच्चाई यही है कि हर चीज की शुरुआत और अंत तय होता है। जब वह समय आए तो हमें उसका सम्मान करना चाहिए। बल्लेबाजी में मैंने हमेशा सही समय पर शॉट खेलने यानी टाइमिंग पर भरोसा किया है, और आज मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदा लेने के लिए यही सही समय है।'
डोंबिवली से टीम इंडिया तक का संघर्ष
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि डोंबिवली से शुरू हुआ उनका सफर सिर्फ एक सपना पूरा करने की जिद थी। एक छोटे से लड़के के रूप में अभ्यास के लिए सफर करने वाले रहाणे ने कहा कि उन्होंने इस खेल को अपना शत-प्रतिशत दिया है। हर पारी उनके लिए देश की कैप पहनने के सपने जैसी थी।
20 साल का सफर और अनमोल यादें
अजिंक्य रहाणे ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से भारतीय क्रिकेट का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है। मुंबई के एक युवा खिलाड़ी के तौर पर शुरुआत करने से लेकर देश के लिए खेलने तक का सफर उनके लिए बहुत बड़ा सम्मान रहा। इस दौरान जीत और हार दोनों आईं, लेकिन खेल की खुशी और यादें ही उनके करियर की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
मेलबर्न की वह ऐतिहासिक पारी हमेशा रहेगी याद
उनके करियर का सबसे स्वर्णिम पल 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी रही। नियमित कप्तान की गैरमौजूदगी में उन्होंने चोटिल और युवा खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम का नेतृत्व किया तथा मेलबर्न में शानदार शतक लगाकर टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनकी कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर धूल चटाई थी।
फैंस और परिवार का जताया आभार
अपने विदाई संदेश में अजिंक्य रहाणे ने अपने परिवार, दोस्तों, कोचों और उन तमाम प्रशंसकों का दिल से शुक्रिया अदा किया जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया। उन्होंने कहा, 'अजिंक्य का मतलब अजेय होता है, लेकिन क्रिकेट ने मुझे हार स्वीकार करना भी सिखाया। हालांकि, एक जगह ऐसी है जहां मैं कभी नहीं हारा, और वह आपके दिल हैं।' उन्होंने अंत में कहा, 'कैप नंबर 278… अब सफर यहीं समाप्त होता है।'
