60 के बाद बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा, माता-पिता के लिए ये मेडिकल टेस्ट हैं जरूरी

बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई तरह के शारीरिक बदलाव आने लगते हैं। विशेष तौर पर 60 वर्ष की आयु के बाद कई गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है, जिनके लक्षण शुरुआत में आसानी से दिखाई नहीं देते हैं। ऐसे में समय-समय पर स्वास्थ्य जांच (हेल्थ चेकअप) करवाना बेहद आवश्यक हो जाता है।

अगर आपके माता-पिता की उम्र भी 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है, तो उनकी सेहत को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें और नियमित अंतराल पर कुछ जरूरी मेडिकल टेस्ट जरूर करवाएं। यह जांच न केवल गंभीर बीमारियों का शुरुआती दौर में पता लगाने में मदद करती हैं, बल्कि समय पर उचित इलाज शुरू होने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को नियंत्रित भी किया जा सकता है।

1. ब्लड प्रेशर टेस्ट

60 वर्ष की आयु के बाद रक्तचाप से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर "साइलेंट किलर" माना जाता है, क्योंकि कई बार इसके कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर दिल, मस्तिष्क और किडनी पर बुरा असर डाल सकता है। नियमित रूप से बीपी की जांच से किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

2. ब्लड शुगर टेस्ट

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में इंसुलिन के कार्य करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे मधुमेह (डायबिटीज) का खतरा उत्पन्न हो जाता है। फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्ट मील शुगर और एचबीए1सी (HbA1c) टेस्ट के माध्यम से शरीर में शुगर के स्तर की सटीक जानकारी मिलती है। समय पर जांच होने से डायबिटीज को नियंत्रित करने और आंखों, किडनी तथा दिल से जुड़ी समस्याओं से बचाव में मदद मिलती है।

3. कोलेस्ट्रॉल टेस्ट

बढ़ती उम्र में शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने की संभावना रहती है। अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल नसों में जमा होकर रक्त संचार (ब्लड फ्लो) को बाधित कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए टोटल कोलेस्ट्रॉल, गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल की जांच की जाती है।

4. हृदय स्वास्थ्य जांच (हार्ट चेकअप)

60 वर्ष के पश्चात हृदय की सेहत का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। उम्र के साथ उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और अन्य कारणों से हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। चिकित्सक की सलाह के अनुसार ईसीजी (ECG), इकोकार्डियोग्राम और अन्य आवश्यक जांच कराई जा सकती हैं। सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या अनियमित धड़कन महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

5. आंखों की नियमित जांच

बढ़ती उम्र के साथ नजर कमजोर होना, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और रेटिना से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं। कई बार आंखों की बीमारियां शुरुआती चरण में बिना किसी लक्षण के बढ़ती हैं। इसलिए 60 वर्ष के बाद नेत्र परीक्षण करवाना आवश्यक है ताकि समय रहते उचित उपचार किया जा सके।

6. हड्डियों की जांच (बोन डेंसिटी टेस्ट)

उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व और मजबूती कम होने लगती है, विशेषकर महिलाओं में मेनोपॉज के बाद यह समस्या अधिक देखी जाती है। बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan) के जरिए हड्डियों की कमजोरी और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्थिति का आसानी से पता लगाया जा सकता है।

7. किडनी फंक्शन टेस्ट

बुजुर्गों में गुर्दे (किडनी) की कार्यक्षमता धीरे-धीरे प्रभावित हो सकती है। किडनी शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। क्रिएटेनियाइन और यूरिन टेस्ट जैसे रक्त परीक्षणों के माध्यम से किडनी के स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया जाता है।

8. लिवर फंक्शन टेस्ट

लिवर शरीर के कई अहम कार्यों, जैसे टॉक्सिन्स बाहर निकालने और चयापचय को नियंत्रित करने में सहायता करता है। उम्र बढ़ने के साथ लिवर की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ सकता है। लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) के द्वारा लिवर से जुड़ी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की समय रहते पहचान की जा सकती है।

9. कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट

60 वर्ष की आयु के पश्चात कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। अतः आयु, लिंग और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर के परामर्श से कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना लाभदायक होता है। शुरुआती अवस्था में बीमारी का पता चलने पर उपचार के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

10. विटामिन डी और बी12 टेस्ट

बुजुर्गों में अक्सर विटामिन डी और विटामिन बी12 की कमी देखी जाती है। इसकी कमी से अत्यधिक थकान, कमजोरी, हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों की समस्या और स्मरण शक्ति से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। ब्लड टेस्ट के जरिए इन विटामिन्स की जांच करवाकर डॉक्टर की सलाह से खानपान में बदलाव या सप्लीमेंट्स लिए जा सकते हैं।

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