नोहकालिकाई फॉल्स की खूबसूरती देख रह जाएंगे दंग, Meghalaya में है प्रकृति का अद्भुत नजारा

मेघालय की गोद में बसा प्राकृतिक सौंदर्य

मेघालय की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच स्थित नोहकालिकाई जलप्रपात प्रकृति की एक बेहद अद्भुत देन है। यह शानदार झरना भारत के सबसे ऊँचे प्लंज वॉटरफॉल्स में शुमार किया जाता है और अपनी अनूठी मनमोहक सुंदरता के चलते देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह खूबसूरत जलप्रपात लगभग 1115 फीट यानी 340 मीटर की ऊँचाई से नीचे गिरता है और यह मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में स्थित चेरापूंजी के बेहद निकट है। इस जगह की खासियत यह है कि इसके चारों ओर फैली हुई हरियाली, बादलों से ढकी पहाड़ियाँ और इस झरने की गूंजती हुई गर्जना यहाँ आने वाले हर सैलानी को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर देती है।

नोहकालिकाई नाम के पीछे छिपी मार्मिक लोककथा

इस जलप्रपात के नाम के पीछे एक बहुत ही दर्दनाक और मार्मिक लोककथा जुड़ी हुई है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ‘लिकाई’ नाम की एक महिला अपने पति की मृत्यु के बाद अपनी छोटी बेटी के साथ जीवन गुजार रही थी। कुछ समय बाद उसने दूसरा विवाह कर लिया, लेकिन उसका नया पति उस छोटी बच्ची से अत्यधिक ईर्ष्या रखता था। एक दिन क्रूरता की हद पार करते हुए उसने उस मासूम बच्ची की हत्या कर दी। जब इस भयावह घटना की जानकारी लिकाई को मिली, तो वह दुःख और वियोग से पूरी तरह व्याकुल हो उठी और उसने इसी ऊँची चट्टान से नीचे छलांग लगा दी। स्थानीय खासी भाषा में “नोह का लिकाई” का शाब्दिक अर्थ “लिकाई की छलांग” होता है और इसी दुखद घटना की याद में इस जलप्रपात का नाम नोहकालिकाई रखा गया।

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