सोमवार के दिन ही क्यों होती है शिवजी की पूजा? क्या है इसका कारण, जानें सावन में इस व्रत के फायदे

सप्ताह के 7 दिनों का संबंध किसी न किसी देवी-देवता और ग्रह से होता है. आपने देखा होगा कि सोमवार के दिन शिव मंदिरों में अन्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ होती है. ऐसे ही गुरुवार के दिन विष्णु मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है. सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत के लिए है, तो गुरुवार का दिन भगवान विष्णु, देव गुरु बृहस्पति की पूजा का है. क्या आप जानते हैं कि सोमवार के दिन ही भगवान शिव की पूजा क्यों करते हैं? उसमें भी सावन सोमवार हो तो उसका महत्व और भी बढ़ जाता है.
सोमवार से शिवजी का क्या संंबंध है?
सोमवार यानि सोम का दिन. चंद्रमा को सोम भी कहा जाता है. सोमवार का मतलब है चंद्रमा का दिन. सोमवार दिन के स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं. चंद्रमा को भगवान शिव ने अपने मस्तक पर धारण किया है.
एक बार चंद्र देव को उनके ससुर प्रजापित दक्ष ने श्राप दे दिया, जिसकी वजह से वे क्षय रोग से पीड़ित हो गए. इसकी वजह से उनकी कांति खोने लगी. तब उन्होंने स्वयं एक शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा की. प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनको दर्शन दिया और उनको मृत्यु से बचाया. अपने मस्तक पर धारण किया, जिससे उनकी कांति वापस मिली. तब से भगवान शिव को चंद्रशेखर कहा जाने लगा, उनको सोमनाथ भी कहते हैं. इस घटना की वजह से भगवान शिव का संबंध सोमवार से हो गया. सोमवार को उनकी पूजा की जाने लगी.
सोमवार व्रत का धार्मिक महत्व क्या है?
मन के कारक ग्रह चंद्रमा ने शिव पूजा करके अपने कष्टों से मुक्ति पायी. इस वजह से लोग सोमवार को व्रत और शिव पूजा करते हैं, ताकि उनके जीवन में भी सुख, शांति और समृद्धि आए. मन एकाग्र हो और शांति मिले. कुंडली के चंद्र दोष को दूर करने के लिए भी सोमवार को शिव जी की पूजा की जाती है.
सोमवार को शिव पूजा करने से क्या फल मिलता है?
जो लोग मनचाहे जीवनसाथी की चाह रखते हैं, उनको सोमवार व्रत के साथ शिव पूजा करनी चाहिए. 16 सोमवार का व्रत करने से मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है. यह व्रत युवक और युवती दोनों ही रख सकते हैं. सोमवार व्रत करने से जल्दी विवाह के योग बनते हैं. सावन सोमवार व्रत रखने से भी यही फायदे होते हैं. सावन शिव जी का प्रिय माह है, इसलिए इसका प्रभाव दोगुना हो जाता है.
