ऑटो रिक्शा परमिट शर्तों का कर रहे हैं उल्लंघन

भोपाल । जबलपुर निवासी अधिवक्ता सतीश वर्मा व नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से मध्य प्रदेश हाइकोर्ट में दायर याचिकाओं में कहा गया कि शहर में चल रहे ऑटो रिक्शा कांट्रेक्ट कैरिज परमिट की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं। इन अवैध ऑटो रिक्शों व इनकी धमाचौकड़ी पर नियंत्रण करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। आग्रह किया गया कि इस मनमानी पर लगाम लगाई जाए। ओवरलोडिंग रोकी जाए। मनमानी किराया वसूली रोकने के लिए किराया सूची सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा की जाए। जगह-जगह रोक कर सवारियां चढ़नने-उतारने की बजाय रुट व स्टॉप फिक्स किए जाएं। मामले में मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने राज्य शासन से पूछा कि प्रदेश भर में बिना परमिट के अवैध रूप से चल रहे ऑटो रिक्शों के खिलाफ क्या नीति है? मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस संजय द्विवेदी की युगलपीठ ने पूर्व में इस संबंध में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने के भी निर्देश दिए। अगली सुनवाई अप्रैल में निर्धारित की गई है। सोमवार को स्वयं याचिकाकर्ता अधिवक्ता सतीश वर्मा व नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के 30 सितंबर के आदेश का उस पालन अब तक नहीं हुआ, जिसके तहत हाई कोर्ट ने अवैध ऑटो रिक्शों का संचालन रोकने को कहा था। अन्य महानगरों की तुलना में जबलपुर में ऑटो रिक्शों की व्यवस्था ध्वस्त है। यहां करीब पांच हजार अवैध ऑटो बिना परमिट के दौड़ रहे हैं। कोर्ट अब तक कई निर्देश दे चुकी है। लेकिन पालन के नाम पर दिखावा हो रहा है।11 जनवरी को विगत सुनवाई के बाद कोर्ट ने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को शपथपत्र पर एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि अधिकारियों द्वारा सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाया जा रहे हैं। पूरे प्रदेश में अवैध ऑटो चल रहे हैं। पिछले सालों में हाइकोर्ट ने समय समय पर कठोर कार्यवाही के आदेश दिए। परन्तु अधिकारियों की लचर कार्य प्रणाली और राजनैतिक दबाव में समस्या का समाधान आज तक नही हो सका है। हाई कोर्ट ने सभी बातों को रिकॉर्ड में लेते हुए पूरे प्रदेश के बिना परमिट के ऑटो के खिलाफ नीति प्रस्तुत करने और पूर्व में दिए आदेशों के पालन का आदेश दिया। राज्य शासन का पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके वर्मा ने रखा। सरकार की ओर आरटीओ जबलपुर का शपथ पत्र पेश कर बताया गया कि इंदौर में 23 हजार से ज्यादा ऑटो चल रहे हैं। जिसमे से 10 हजार बिना परमिट के हैं। इसी तरह भोपाल में 15 हजार में से अधिकांश ऑटो बिना परमिट के चल रहे है । इसके अलावा ये भी बताया गया कि इंदौर और भोपाल में जबलपुर के अपेक्षाकृत ट्रेफिक की स्थिति बेहतर है। परिवहन आयुक्त द्वारा सभी आरटीओ कलेक्टर व एसपी को ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए कहा गया है।
