देवरिया में सुनाई दे रही है बीजेपी सांसद के ‘जूतों’ की गूंज, शहर में लगी यह होर्डिंग…

2019 लोकसभा चुनाव अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचने को है. यूपी की राजनीति में पूर्वांचल का हमेशा से अपना महत्व रहा है. पूर्वांचल की बात अगर की जाए तो बीजेपी को गठबंधन से कड़ी टक्कर लेनी पड़ रही है. इसी क्रम में गुरुवार को देवरिया में लगी एक होर्डिंग सुर्खियों में बनी हुई है. इस जिले में भाजपा के प्रत्याशी रमापति राम त्रिपाठी को देवरिया जिले मे भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. कोआपरेटिव बैंक चौराहे पर लगी विवादित होर्डिंग की जानकारी मिलते ही देवरिया प्रशासन ने उसे उतार दिया.

देवरिया बचाओं मंच के बैनर तले लगे इस होर्डिंग में लिखा है क्या वो सही है? मैं ऐसे जातिवादी सोच वालों की निन्दा करता हूं…दरअसल गोरखपुर और आसपास के इलाके में ठाकुर और ब्राह्मण वर्चस्व की लड़ाई पुरानी है. अब जूता कांड के बाद दोनों खेमे एक-दूसरे के सामने आ गए हैं.

बता दें कि देवरिया संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत 5 विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिसमें देवरिया, तमकुही राज, फाजिलनगर, पथरदेवा और रामपुर कारखाना शामिल है, यहां से एक भी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं है. आपको बता दें कि बीजेपी ने कद्दावर नेता रमापति राम त्रिपाठी को सीट से उतारा गया है. रमापति राम बीजेपी के पुराने नेता हैं और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी माने जाते हैं.

देवरिया सीट बीजेपी के लिए बेहद अहम है क्योंकि यह संसदीय क्षेत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र के पड़ोस में पड़ता है. पिछले चुनाव में बीजेपी को जीत मिली थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में सत्ता में फिर से लौटने के लिए बीजेपी को यह सीट हर हाल में जीतनी होगी, लेकिन आम चुनाव से पहले सपा-बसपा के बीच चुनावी गठबंधन के बाद मुकाबला रोचक हो गया है.

कौन हैं रमापति राम त्रिपाठी

रमापति राम राज्य बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष हैं. वो वर्तमान में यूपी विधान परिषद के सदस्य हैं. त्रिपाठी पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं. उनके पुत्र शरद त्रिपाठी 2014 में संत कबीर नगर से सांसद चुने गए थे. लेकिन हाल ही बीजेपी के ही एक विधायक के साथ मार-पीट के मामले को लेकर शरद त्रिपाठी को अपना टिकट गंवाना पड़ा है. अब उनकी सीट पर बीजेपी ने प्रवीण निषाद को खड़ा किया है.

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