पैराडाइज पेपर्स: काली कमाई की जन्नत, मशहूर शख्सियतों के नाम आए सामने

नई दिल्ली । इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (आइसीआइजे) ने रविवार रात को इंटरनेट पर बड़ा तहलका मचा दिया। संस्था ने पैराडाइज पेपर्स नाम से 1.34 करोड़ लीक फाइलों को इंटरनेट पर जारी किया। इन फाइलों में देश और दुनिया के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली लोगों और कंपनियों की विदेशी निवेश से जुड़ी खुफिया जानकारियां मौजूद हैं। इसमें कई भारतीय नामों सहित ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ, डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सरकार के कई मंत्री, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे नाम शामिल हैं।
क्या हैं पैराडाइज पेपर्स
अपने देश में टैक्स बचाने के लिए विदेश में किए गए निवेश के बारे में खुफिया जानकारी देने वाले दस्तावेजों का पुलिंदा है। ये पेपर्स खुलासा करते हैं कि कैसे दुनियाभर के राजनेता, सेलेब्रिटी और अमीर लोग अपने अर्जित संपत्ति पर टैक्स बचाने के लिए टैक्स हेवेन देशों में निवेश करने के साथ तमाम हथकंडे अपनाते हैं।
कैसे हुआ खुलासा
जर्मनी के अखबार ज्यूड डॉयचे त्साइटुंग के हाथ यह पेपर्स लगे। कंपनी ने अपने सूत्र सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसी अखबार को पिछले साल पनामा पेपर भी मिले थे। अखबार ने इन खुफिया दस्तावेजों को अमेरिका स्थित इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स संस्था के साथ साझा किया। इस संस्था ने 67 देशों से तकरीबन 100 मीडिया समूहों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ा। 380 पत्रकारों ने मिलकर इन दस्तावेजों का महीनों तक अध्ययन किया। इसके बाद इन्हें जारी किया गया।
क्या है एपलबी
यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑफशोर कानूनी सलाह देने वाली कंपनी है जो कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और अमीरों को कानूनी सलाह देती है और विदेश में कंपनियों को रजिस्टर करने में मदद करती है। करीब 127 साल पळ्रानी यह संस्था 1890 में स्थापित हुई। कंपनी का मुख्यालय बरमूडा में है। दस्तावेजों के मुताबिक इस कंपनी के सर्वाधिक 31,000 क्लाइंट अमेरिका से हैं। इसके बाद ब्रिटेन से 14,000 और बरमूडा से 12,000 ग्राहक हैं।
कहां से मिले ये दस्तावेज
1400 जीबी से अधिक इस डाटा में तकरीबन 1.34 करोड़ दस्तावेज हैं। इसमें से तकरीबन 68 लाख ऑफशोर लीगल सर्विस देने वाली कंपनी एपलबी और कारपोरेट सेवा प्रदाता कंपनी एस्ट्रा से हैं। यह दोनों कंपनियां एपलबी नाम से ही काम करती थी। 2016 में एस्ट्रा स्वतंत्र रूप से काम करने लगी। 60 लाख दस्तावेज कारपोरेट रजिस्ट्री से हैं। यह कारपोरेट अधिकतर कैरीबियाई क्षेत्र के 19 अधिकार क्षेत्रों में आते हैं। कुछ दस्तावेज सिंगापुर स्थित इंटरनेशनल ट्रस्ट और कारपोरेट सेवा प्रदाता कंपनी एशियासिटी ट्रस्ट से हैं। इन पेपर्स में 1950 से 2016 तक के दस्तावेज मौजूद हैं।
क्या हैं टैक्स हेवेन
टैक्स हेवेन या ऑफशोर फाइनेंस सेंटर ऐसे स्थान होते हैं जो किसी कंपनी या व्यक्ति के अपने देश के कायदे-कानून के दायरे में नहीं आते और जहां निवेश करके वे अपना टैक्स बचा सकते हैं। यह टैक्स हेवेन अधिकतर गुप्त और स्थायी होते हैं। ज्यादातर यह छोटे द्वीप होते हैं। स्विट्जरलैंड, आयरलैंड और नीदरलैंड टैक्स कम करने के लिए प्रसिद्ध हैं, जबकि ब्रिटेन और अमेरिका ऑफशोर फाइनेंस सेंटरों की सुविधा प्रदान करने वाले शीर्ष देश हैं।
विदेश में निवेश के लिए रिजर्व बैंक के दिशानिर्देश
कोई भारतीय व्यक्ति या इकाई किसी विदेशी कंपनी में पूंजी लगाकर, शेयर खरीदकर और पूर्ण स्वामित्व वाली या संयुक्त उद्यम इकाई लगाकर निवेश कर सकती है।
भारत से 714 नाम
टैक्स बचाने के लिए विदेश में निवेश करने वाले भारत के कई नामी चेहरे शामिल हैं। दस्तावेजों में 180 देशों के आंकड़े मौजूद हैं। इसमें नामों की संख्या के हिसाब से भारत 19वें स्थान पर है। कुल 714 भारतीय कंपनियां व व्यक्ति शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा
2014 से पहले भारत में ओमिदयार नेटवर्क के मैनेजिंग डायरेक्टर थे। कंपनी ने अमेरिकी कंपनी डी.लाइट डिजायन में निवेश किया जिसकी केमेन द्वीप पर सहायक कंपनी है। डी.लाइट डिजायन ने केमेन द्वीप वाली कंपनी के जरिए तीन लाख अमेरिकी डॉलर का लोन लिया। जब ये फैसले लिए गए तब इस समय सिन्हा डी.लाइट डिजायन में निदेशक थे।
विजय माल्या
अपनी यूनाइटिड स्पिरिट़्स लिमिटेड को 2013 में डिएगिओ ग्रुप को बेच दिया। इसके बाद लंदन की एक कानूनी सलाहकार कंपनी की मदद से यूएसएल में ढांचागत बदलाव करने के अधिकार ले लिए। डिएगिओ ने इस काम के लिए लंदन स्थित लिंकलेटर्स एलएलपी से संपर्क किया। डिएगियो ने टैक्स हेवेन ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में स्थित यूएसएल होल्डिंग्स लिमिटेड और ब्रिटेन में उनकी तीन साथी कंपनियों पर 1.5 अरब डॉलर के उधार को माफ कर दिया। डिएगियो ने माल्या की वॉटसन लिमिटेड को भी 58 लाख डॉलर की यूएसएल ग्रुप कंपनी के उधार चुकाने से मुक्त कर दिया। नतीजतन डिएगियो ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को जो 1,225 करोड़ रुपये बताए, माल्या उससे कहीं ज्यादा लेकर गया। यह राशि तकरीबन 10,000 करोड़ रुपये है।
डॉ अशोक सेठ
फोर्टिस-एस्कॉट्र्स अस्पतालों के चेयरमैन डॉ अशोक सेठ को 2004 में सिंगापुर स्थित स्टेंट बनाने वाली कंपनी ने शेयर दिए।
दिलनशीन संजय दत्त
फिल्म अभिनेता संजय दत्त की पत्नी मान्यता कई कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में दिलनशीन के नाम से शामिल हैं। इनमें दिक्श एनर्जी प्रा.लि, स्पाकर्मैटिक्स एनर्जी प्रा.लि, दिक्श रियल्टी प्रा.लि समेत कई कंपनियों के नाम हैं। अप्रैल, 2010 में बहमास में नैसजय कंपनी की स्थापना हुई जिसमें उन्हें डायरेक्टर, एमडी, अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2010 में कंपनी की पूंजी 5,000 अमेरिकी डॉलर थी।
नीरा राडिया
माल्टा की दो कंपनियों में हिस्सेदार थीं। दोनों ही कंपनियां लगातार अपने नाम बदलती रहीं। मार्च, 2014 में सीरियस फ्रॉड इंवेस्टीगेशन ऑफिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह कंपनी एक्ट के उल्लंघन के लिए राडिया के वैष्णवी समूह पर मुकदमा चलाने जा रहा है।
हर्ष मोइली
कांग्रेस की सरकार में जब वीरप्पा मोइली केंद्रीय मंत्री थे, तब उनके बेटे हर्ष मोइली ने एक कंपनी का गठन किया जिसे युनाइट्स ग्रुप की साथी कंपनियों से निवेश मिला। मॉरीशस की युनाइट्स इंपैक्ट्स पीसीसी का सिर्फ एक शेयरहोल्डर था युनाइट्स इंपैक्ट पार्टनर्स एलएलसी।
कार्ति चिदंबरम, अशोक गहलोत, सचिन पायलट
एपलबी मॉरीशस ने एक कंपनी रजिस्टर की जिसमें एक भारतीय कंपनी में निवेश किया था। यह राजस्थान के एंबुलेंस घोटाले के संबंध में जांच के दायरे में है। इस कंपनी के संस्थापकों में कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री व्यालार रवि के बेटे एक हैं। इसमें राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम और पूर्व केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट का नाम भी शामिल है।
