पोलियो और दंगा मुक्त गुजरात को अब बनाना है हैंडपंप और रोग मुक्त गुजरातः मुख्यमंत्री

अहमदाबाद | मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राज्य के दुर्गम इलाकों सहित दूरदराज के गांवों में शुद्ध और पर्याप्त पेयजल पहुंचाकर पोलियो और दंगा मुक्त गुजरात की तरह जल जनित रोग और हैंडपंप मुक्त गुजरात के निर्माण की प्रतिबद्धता जताई है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को राज्य के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्र डांग में 47 करोड़ रुपए की लागत से आकार लेने वाली जलापूर्ति योजना के शिलान्यास के साथ इस वनबंधु क्षेत्र को कुल 75 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात एक ही दिन में देते हुए यह बात कही। रूपाणी ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी लोगों को क्षार और फ्लोराइड मुक्त पानी मुहैया कराने के सुदृढ़ आयोजन के साथ जलापूर्ति योजनाओं के मार्फत घर-घर नल से शुद्ध जल पहुंचाने का भगीरथ अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि पानी की किल्लत के चलते अब लोगों को घड़ा लेकर दूर-सुदूर तक जाना न पड़े या फिर हैंडपंप का दूषित पानी न पीना पड़े उसके लिए इस सरकार ने समयबद्ध आयोजन कर करोड़ों रुपए के खर्च से योजनाओं को साकार किया है। उन्होंने कहा कि दंगा मुक्त, फाटक मुक्त और शौचालय युक्त गुजरात की तरह अब जल जनित रोगों से मुक्त गुजरात बनाकर घर-घर शुद्ध पानी पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘नल से जल’ के अंतर्गत प्रत्येक घर को नल के जरिए पानी पहुंचाने के लिए गुजरात में जलापूर्ति विभाग ने गहन कार्य शुरू किया है। ग्रामीण क्षेत्रों सहित कुल 95 लाख नल कनेक्शन देने का कार्य शुरू हो चुका है। वर्ष 2022 से पूर्व राज्य के सभी गांवों के सौ फीसदी घरों में नल से जल को साकार करने का संकल्प व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डांग जैसे पहाड़ी इलाके में बिखरे गांवों और उपनगरीय क्षेत्रों में पानी पहुंचाने के लिए राज्य के अन्य क्षेत्रों की तुलना में प्रति व्यक्ति खर्च के अधिक होने के बावजूद राज्य सरकार ने विशेष व्यवस्था करते हुए वनबंधु क्षेत्र में शुद्ध पानी पहुंचाने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि राज्य के 14 जिलों की 54 तहसील वाले आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रहने वाले वनबंधुओं को सिंचाई का पानी और जल समृद्धि उपलब्ध कराने की निर्णायकता के साथ चार वर्ष में छोटी-बड़ी सिंचाई योजनाओं के विभिन्न 1641 कार्यों के जरिए कुल 4 लाख 24 हजार 507 एकड़ जमीन में सिंचाई की सुविधा मुहैया कराई है।
रूपाणी ने कहा कि 2016 से 2020 के दौरान इन क्षेत्रों में छोटी सिंचाई योजनाओं, हाई लेवल कैनाल, छोटे-बड़े चेकडैम, लिफ्ट इरिगेशन स्कीम (एलआई स्कीम) यानी उद्वहन सिंचाई योजनाओं के कार्य बड़े पैमाने पर शुरू करने के लिए संबंधित विभागों को प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि 344 एलआई स्कीम, 234 छोटी-बड़ी सिंचाई योजनाओं, 432 छोटे-बड़े चेकडैम तथा 617 अनुश्रवण तालाबों के मार्फत जनजातीय क्षेत्रों की कुल मिलाकर 4,24,507 एकड़ जमीन को सिंचाई का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी, दुर्गम तथा विषम भौगोलिक स्थिति वाले क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा के लिए 3796 करोड़ रुपए लागत वाली विभिन्न 10 उद्वहन सिंचाई योजनाओं के कार्यों को भी राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्तरों पर जारी इन योजनाओं का कार्य पूरा होने पर महीसागर, दाहोद, पंचमहाल, सूरत, नर्मदा, भरुच और तापी जिले की 21 तहसीलों के 590 गांवों में सिचाई की सुविधा मिलने लगेगी। उन्होंने कहा कि अतीत की सरकारों ने जनता की बुनियादी जरूरतों का काम न कर उनके साथ विश्वासघात किया था। शौचालय, शुद्ध पेयजल, आवास और गैस कनेक्शन जैसे कार्यों को पूरा कर भाजपा सरकार ने आम लोगों की मूलभूत जरूरतों की पूर्ति की है। क्षार युक्त पानी पीने के कारण लोगों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया था, तब हैंडपंप मुक्त गुजरात की दिशा में राज्य सरकार आगे बढ़ रही है। राज्य में जारी विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में राज्य में अनेक नए प्रकल्प-योजनाएं जनता को समर्पित किए जा रहे हैं। राज्य में जारी जलापूर्ति के कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 तक राज्य के घर-घर में नल से जल पहुंचाने का कार्य शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डांग जैसे पहाड़ी और दूर्गम क्षेत्र में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या के निवारण के लिए हमने मोबाइल टावर कनेक्टिविटी के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के 8 करोड़ रुपए के कार्यों को सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी है। आदिजाति, वन तथा महिला एवं बाल कल्याण मंत्री गणपतसिंह वसावा ने आदिवासी समाज के लिए कई विकास कार्यों की भेंट देने वाली संवेदनशील राज्य एवं केंद्र सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को साकार करने को प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार ने चरणबद्ध आयोजन किए हैं।
माता एवं बाल मृत्यु दर को लेकर चिंतित मुख्यमंत्री ने आदिजाति विकास विभाग के अनुदान से डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से डांग जिले में ब्लड सेंटर कार्यरत कराया है। उन्होंने कोरोना काल में भी जनता के साथ खड़ी रहने वाली सरकार के विभिन्न विकास कार्यों का जिक्र करते हुए आगामी दिनों में सरकार के विकास आयोजन पर प्रकाश डाला। डांग जिले में आह्वा के निकट लश्कर्या में मुख्यमंत्री ने जलापूर्ति विभाग की लगभग 47 करोड़ रुपए लागत की पांच विभिन्न योजनाओं के शिलान्यास के साथ करीब 28 करोड़ रुपए के खर्च से डांग जिले में तैयार हुए वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर, सहकार भवन, सामूहिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्रों का लोकार्पण किया। उन्होंने आह्वा के सिविल हॉस्पिटल परिसर में कार्यरत ब्लड सेंटर भी जनता को समर्पित किया। मुख्यमंत्री ने डांग जिले की गर्भवती महिलाओं तथा नवजात शिशु की स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रयोशा प्रतिष्ठान और दिवालीबेन ट्रस्ट प्रायोजित ‘मातृशक्तिकरण प्रकल्प’ का शुभारंभ करते हुए प्रसूता महिलाओं को सुखड़ी, पोषक तत्व और बेबी किट का वितरण किया। जिले की सभी संस्थागत प्रसूति की लाभार्थी महिलाओं को संस्था की ओर से किट वितरित की जाएगी।
डांग जिला प्रभारी और वन राज्य मंत्री रमणलाल पाटकर ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जनता और प्रशासन के सहयोग से राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास हो रहा है। इस मौके पर वलसाड़-डांग के सांसद डॉ. केसी पटेल और विधायक विजयभाई पटेल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
