भगवान जगन्नाथ हुए बीमार, द्वितीया तक रहेंगे शयन कक्ष में

रायपुर। पौराणिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर राजधानी में भगवान जगन्नाथ को श्रद्घालुओं ने परंपरागत पवित्र नदियों के जल से स्नान कराया। जिसके बाद देर शाम को भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ होकर शयन कक्ष में चले गए।


अब आषाढ़ मास की द्वितीया तक भगवान शयन कक्ष में रहेंगे और मंदिर में उनके मुकुट की पूजा होगी। इस दौरान भगवान को आयुर्वेदिक औषधि देकर उनका उपचार वैद्य द्वारा किया जाएगा। स्वस्थ होने के बाद भगवान 14 जुलाई को प्रजा का हाल जानने रथयात्रा पर निकलेंगे।


15 दिन तक मंदिर के पट रहेंगे बंद


चार धामों में से एक ओड़िसा के प्रसिद्घ तीर्थस्थल जगन्नााथ पुरी में जिस तरह रथयात्रा की धूम रहती है और रथयात्रा के दौरान जिन रस्मों का पालन किया जाता है। पुरानी बस्ती स्थित जगन्नाथ मंदिर के पुजारी तिलक दास ने बताया कि ठीक वैसी ही रस्में राजधानी रायपुर के जगन्नाथ मंदिरों में भी निभाई जाती हैं।


ऐसी ही रस्मों में से एक रस्म भगवान जगन्नााथ को स्नान कराने, बीमार पड़ने और 15 दिन तक मंदिर के पट बंद रखने की है। साथ ही पट बंद रहने के दौरान भगवान का इलाज करने के लिए औषधियुक्त काढ़ा पिलाने की रस्म भी शामिल है।


श्रद्घालुओं ने कराया भगवान को स्नान


राजधानी के सबसे प्राचीन पुरानी बस्ती टुरी हटरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में सुबह भगवान को स्नान कराने के लिए श्रद्घालुओं की भीड़ रही। सदियों से चली आ रही इस परंपरा में हर श्रद्घालु भक्ति-भाव के साथ रमा हुआ दिखा।


भगवान को स्नान कराकर हर कोई पुण्य कमाना चाह रहा है। इसी तरह का दृश्य प्राचीन मंदिर के अलावा गायत्री नगर, सदरबाजार, गुढ़ियारी, आमापारा स्थित जगन्नााथ मंदिरों में भी नजर आया। पवित्र नदियों के जल से अत्यधिक स्नान के चलते अब भगवान अस्वस्थ हो गए हैं।


हाल चाल पूछने पर हजार गुणा होगा पुण्य


सदरबाजार स्थित जगन्नााथ मंदिर के पुजारी परिवार के सदस्य बताते हैं कि अब 15 दिनों तक मंदिर के पट बंद रहते हैं। तब भक्त भगवान का दर्शन नहीं कर सकते। मंदिर के बाहर से ही मत्था टेककर लौट जाते हैं। इस दौरान जो भक्त भगवान का हालचाल पूछने मंदिर की चौखट तक पहुंचते हैं, उन्हें दर्शन करने से हजार गुणा ज्यादा पुण्य फल की प्राप्ति होती है।


औषधियुक्त काढ़े का प्रसाद


भक्त पुरेंद्र मिश्रा ने बताया कि भगवान जल्द ठीक हों, इसके लिए कई तरह की औषधि के मिश्रण से काढ़ा बनाया जाता है। जिसे सुबह और शाम भोग भगवान को लगाने के बाद भक्तों में बांटा जाता है। किसी मंदिर में तीन तो किसी मंदिर में पांच दिन तक भगवान को काढ़ा पिलाने की रस्म निभाई जाएगी। औषधि का प्रसाद लेने मंदिर में श्रद्घालुओं का तांता लगा रहता है। वहीं जो भक्त भक्तिभाव से काढ़ा रूपी प्रसाद को ग्रहण करता है वह सालभर तक निरोगी रहता है।


14 को मंदिर से बाहर आएंगे भगवान


15 दिन के बाद जब मंदिर के पट खोले जाएंगे तब दो दिवसीय उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। 12 जुलाई को नेत्रोत्सव पर भगवान का श्रृंगार किया जाएगा। दूसरे दिन 14 जुलाई को भगवान जगन्नााथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को साथ लेकर अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से बाहर आएंगे। तीन अलग-अलग रथ पर सवार होकर वे मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाएंगे। 10 दिनों बाद भगवान पुनः देवशयनी एकादशी पर मंदिर लौटेंगे।


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