मुंबई में हुई नीति आयोग की बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री विजय रूपाणी

अहमदाबाद | मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने देश की कृषि क्षेत्र में परिवर्तन के लिए नीति आयोग द्वारा गठित मुख्यमंत्रियों की उच्च स्तरीय समित की मुम्बई में हुई बैठक में सुझाव दिए। उन्होंने मॉडल APMC एक्ट, कॉंट्रेक्ट फॉर्मिंग, डेयरी फॉर्मिंग, एग्री एक्सपोर्ट पॉलिसी जैसे विषयों पर गुजरात की अग्रसरता और उपलब्धियों को पेश किया।  
देश के किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि क्षेत्र में परिवर्तन के लिए अपने सुझाव व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मॉडल APMC में जो व्यवस्थाएं और प्रावधान सुझाए गए हैं, वह ज्यादातर गुजरात के प्रवर्तमान मॉडल APMC एक्ट में शामिल ही हैं। इस एक्ट के प्रावधान ऐसे होने चाहिए किसान वर्ग के लिए लाभदायक हों। इससे उसे मार्केट यार्ड में अपने उत्पाद बेचने के साथ ही वेल्युएडिशन का लाभ भी मिलना चाहिए।
नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट ई-नाम पद्धति के अंतर्गत अपने सुझाव रखते हुए उन्होंने कहा कि बहुधा जणसियों को ई नाम के तहत शामिल करने के स्थान पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ विशेष उत्पादों को ही शामिल किया जाए। छोटे किसान अपने तरीके से अथवा कमीशन एजेंट के मार्फत ई नाम के अंतर्गत अपना उत्पाद बेच सकते हैं, इसके लिए पोर्टल में ऑप्शन होना चाहिए। इसके कारण छोटे किसान अपनी फसल- उत्पाद का अच्छा भाव पाकर लाभ कमा सकते हैं। कॉंट्रेक्ट फॉर्मिंग और समान प्रकार से सहकारिता कृषि विषय पर राज्य के गांधीनगर जिले के शिवपुरा कम्पा में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में सामूहिक खेती हो रही है, इसका उल्लेख श्री रूपाणी ने करते हुए कहा कि सामूहिक खेती के कारण किसान ज्यादा लाभ कमाएं, कृषि में नवीन टेक्नीक्स का अमल कर सकें और खरीद-बिक्री के लिए बार्गेनिंग पावर बढ़ा सकें, इसके लिए कॉंट्रेक्ट फॉर्मिंग के तहत सामूहिक खेती को बेस्ट प्रेक्टिसिस मानकर ऐसे किसानों के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को विशेष योजना शुरु करनी चाहिए। गुजरात के किसान समृद्ध हैं, इसका एक कारण खेतीबाड़ी के साथ वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन विकास भी है। गुजरात में पशुओं का क्रत्रिम गर्भाधान, आईवीएफ, एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसी पद्धतियों का अमल, सामूहिक पशु टीकाकरण, पोषणयुक्त आहार उपलब्धता, डेयरी- पशुपालन संलग्न तालीम और इंफ्रास्ट्रक्चर फेसिलिटीज़ संबंधी भूमिका मुख्यमंत्री ने प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि यही पद्धति देश के अन्य राज्य भी अपनाएं, इसकी आवश्यकता है।
दूध उत्पादन और व्यापार के बारे में उन्होंने कहा कि डेयरी उद्योग में गुजरात और देश के किसानों- पशुपालकों को अच्छे भाव मिलते हैं। ऐसे में डेयरी प्रोडक्ट में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से अन्य देशों का दूध आयात हो तो किसानों- पशुपालकों पर विपरीत असर पड़ सकता है। उन्होंने इस मामले में योग्य और किसानों के लिए लाभदायी विचार के बाद ही निर्णय लेने का प्रेरक सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए यह व्यवस्था उपयुक्त है। तिलहन फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद करने के बाद एनडीडीबी और नाफेड जैसी संस्थाओं द्वारा तिलहनों का प्रोसेसिंग कर तेल पैकिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहित कार्य भी होने आवश्यक हैं। इससे तिलहन फसलों के मार्केट में स्पर्धात्मक वातावरण खड़ा होगा जो अंतत: किसानों को फसल का बेहतर भाव दिलवाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात तेल उत्पादन और मतस्य उत्पादन के निर्यात में देश में अग्रिम पंक्ति में है। राज्य के किसान निर्यात द्वारा ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकें, इसके लिए अन्य देशों के आयात के नीति-नियम, मांग-आपूर्ति की स्थिति के डेटा और निर्यात के लिए आवश्यक सुविधा- संसाधन खड़े करने के लिए APEDA-MPEDA की ज्यादा सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने किसानों के उत्पादों के संग्रह के लिए वैज्ञानिक पद्धति के संग्रह स्थल-गोदाम-वेर हाउस की आवश्यकता पर कहा कि जल्दी खराब हो जाने वाले उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज चेन के लिए गुजरात में आर्थिक सहायता की विशेष योजना है जो राष्ट्रीय स्तर पर लागु होनी चाहिए।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के संयोजन में आयोजित इस बैठक में केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्रसिंह तोमर, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश और उड़ीसा के कृषि मंत्री, पंजाब के वित्त मंत्री, भारत सरकार के कृषि सचिव, नीति आयोग के कृषि सदस्य सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस हाईपावर कमेटी की प्रथम बैठक 18 जुलाई को दिल्ली में हुई थी।

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