29वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन : ‘एआई बेस्ड गवर्नेंस फॉर ऑल’ विषय पर प्रथम प्लेनरी ब्रेकआउट,

जयपुर: राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के प्रथम प्लेनरी सत्र का मुख्य केंद्र 'एआई बेस्ड गवर्नेंस फॉर ऑल' विषय रहा। इस महत्वपूर्ण सत्र में देश के जाने-माने विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान यह बात प्रमुखता से उभर कर आई कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का सही उपयोग करके न केवल आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सकता है, बल्कि सुशासन को समाज के अंतिम व्यक्ति तक भी पहुंचाया जा सकता है।
मातृभाषा में सुशासन और डेटा एकीकरण पर जोर
केन्द्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि नागरिकों को सरकारी काम अपनी मातृभाषा में करने की आजादी मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें किसी अनुवादक की जरूरत न पड़े। उन्होंने 'भाषिणी' जैसे एआई प्लेटफॉर्म का जिक्र करते हुए बताया कि ये तकनीक स्थानीय भाषाओं और बोलियों में अनुवाद कर शासन को प्रभावी बना रही हैं। इसके साथ ही, सीपी ग्राम जैसे ऐप के जरिए न्यायिक दस्तावेजों का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद हो रहा है, जिससे लोगों को अपनी भाषा में न्याय मिलना आसान हुआ है। उन्होंने सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के बड़े डेटा सेट्स को एआई की मदद से एकीकृत और व्यवस्थित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
विश्व में तीसरी सबसे बड़ी एआई महाशक्ति बना भारत
सत्र की दूसरी पैनलिस्ट और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की वैज्ञानिक-जी सुश्री कविता भाटिया ने देश की तकनीकी प्रगति के आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि भारत 60 लाख एआई वर्कफोर्स और 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स के साथ वैश्विक स्तर पर एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में एआई वाइब्रेंसी (सक्रियता) के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि देश के कई राज्यों में सड़कों के गड्ढों की पहचान करने और बेहतर बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एआई का इस्तेमाल हो रहा है। नागरिक सेवाओं को समावेशी और बेहतर बनाने के लिए अब एआई का उपयोग अनिवार्य होता जा रहा है।
वंचित वर्गों का सशक्तीकरण और डिजिटल समानता
तीसरे पैनलिस्ट और डेलॉइट के कंसल्टिंग लीडर श्री एन.एस.एन. मूर्ति ने कहा कि एआई समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का एक बड़ा जरिया बन सकता है। उन्होंने बताया कि किस तरह किसान और दिव्यांगजन एआई-आधारित समाधानों का सीधा लाभ उठा रहे हैं। वहीं, गेट्स फाउंडेशन के डिप्टी डायरेक्टर श्री अर्नव कपूर ने एआई को दुनिया का सबसे बड़ा 'इक्वलाइजर' (समानता लाने वाला) करार दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक की पहुंच हर नागरिक तक होनी चाहिए, लेकिन साथ ही लोगों में इसके प्रति विश्वास जगाना भी जरूरी है ताकि वे किसी धोखाधड़ी के डर से इस तकनीक के इस्तेमाल से पीछे न हटें।
'विकसित भारत 2047' का संकल्प होगा पूरा
नीति आयोग के प्रोग्राम डायरेक्टर और एडवाइजर श्री प्रदीप सिंह ने बताया कि नीति फ्रंटियर टेक हब की पहल देश में तकनीक-आधारित सुशासन को नई गति दे रही है। यह नवाचार वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के आने से सरकारी तंत्र अधिक पारदर्शी, कुशल और सीधे नागरिकों के प्रति जवाबदेह बनेगा।
प्रश्नोत्तर सत्र के साथ कार्यक्रम का समापन
सत्र के अंतिम चरण में उपस्थित प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के बीच एक सवाल-जवाब का दौर चला, जिसमें एआई के सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल से जुड़े कई पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस सत्र के दौरान राजस्थान के मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के विशिष्ट सचिव एवं आयुक्त श्री हिमांशु गुप्ता ने सभी आमंत्रित पैनलिस्टों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
