कई राज्यों में स्थित हैं प्राचीनतम श्रीकृष्ण मंदिर

नई दिल्ली,। देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित श्रीकृष्ण मंदिर अपनी प्राचीनता, भव्य स्थापत्य कला, धार्मिक मान्यताओं और विशिष्ट पूजा पद्धतियों के लिए प्रसिद्ध हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर इन मंदिरों में रौनक रहती है। मथुरा और वृंदावन से लेकर द्वारका, जयपुर, नाथद्वारा, उडुपी और पुरी तक भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। केरल का तिरुवरप्पु श्रीकृष्ण मंदिर अपनी प्राचीन धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। करीब डेढ़ हजार साल पुराना माना जाने वाला यह मंदिर जन्माष्टमी में खूब सजाया जाता है। वहीं मथुरा में स्थित द्वारकाधीश मंदिर कृष्ण जन्मोत्सव के समय आस्था और उल्लास का प्रमुख केंद्र बन जाता है। गुजरात के द्वारका में स्थित द्वारकाधीश मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। जगत मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह भव्य मंदिर गोमती नदी के किनारे स्थित है और पश्चिमी धाम के रूप में भी विशेष धार्मिक महत्व रखता है। जन्माष्टमी पर मंदिर में विशेष सजावट की जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहा पहुंचते हैं।
वृंदावन का श्री बांके बिहारी मंदिर कृष्ण भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जन्माष्टमी के दौरान यहां विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिलता है। मथुरा का श्री जुगलकिशोर मंदिर भी अपनी प्राचीन परंपराओं और कृष्ण भक्ति से जुड़ी मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है। जयपुर का ऐतिहासिक गोविंद देवजी मंदिर भी कृष्ण भक्तों के लिए बेहद खास है। सिटी पैलेस परिसर में स्थित इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के गोविंद देवजी स्वरूप के साथ राधा रानी की पूजा की जाती है। मंदिर की स्थापना जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय से जुड़ी बताई जाती है। जन्माष्टमी पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।
दक्षिण भारत में कर्नाटक का वेणुगोपाल स्वामी मंदिर और उडुपी श्रीकृष्ण मठ भी प्रमुख कृष्ण तीर्थस्थलों में शामिल हैं। उडुपी में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन विशेष खिड़की कनकन किंडी के माध्यम से किए जाते हैं। इसके अलावा राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर, चित्तौड़गढ़ जिले का सांवलिया सेठ मंदिर और ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर भी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। जन्माष्टमी पर इन मंदिरों में होने वाले विशेष आयोजन, पूजा-अर्चना श्रद्धालुओं को कृष्ण भक्ति के रंग में रंग देते हैं।
