बीएचयू में सुश्रुत की शल्य परंपरा पर हुई चर्चा, मालवीय की प्रतिमा का अनावरण*

वाराणसी । काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्वेद विभाग में प्रो. पी. जे. देशपांडे मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारत रत्न पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के बीच संबंधों पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि एवं वक्ता प्रो. हरिशंकर शुक्ला ने कहा कि भारत की चिकित्सा परंपरा का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। आचार्य सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा को व्यवस्थित और वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान कर विश्व चिकित्सा को महत्वपूर्ण दिशा दी। उनके शल्य सिद्धांत और चिकित्सा पद्धतियां आज भी चिकित्सा शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक पक्ष को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।प्रो. शुक्ला ने प्रो. पी. जे. देशपांडे के चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा क्षेत्र में योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल तकनीकी दक्षता नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन, समर्पण और मानवता का भी विषय है। देशपांडे की शिक्षण परंपरा भावी चिकित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत है।कार्यक्रम में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी से संबंधित लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। इसमें अभिनेता सुनील दत्त की अतिथि भूमिका रही। इसके बाद प्रो. जे. देशपांडे के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।कार्यक्रम की अध्यक्षता चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन शंखवार ने की। आयुर्वेद विभाग की प्रथम महिला अध्यक्ष डॉ रश्मि गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। वरिष्ठ प्रो लक्ष्मण सिंह ने आयुर्वेद संकाय प्रमुख का स्वागत किया तथा मुख्य अतिथि एवं वक्ता प्रो. हरिशंकर शुक्ला का परिचय कराया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, चिकित्सक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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