दिल्ली में प्रदूषण पर एआई का वार: धूल पर नजर रखने के लिए सरकार जल्द लॉन्च करेगी ‘डस्ट पोर्टल 2.0’

नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी में धूल और निर्माण कार्यों से होने वाले वायु प्रदूषण पर नकेल कसने के लिए सरकार अब पूरी तरह तकनीक आधारित अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार कर रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) बहुत जल्द 'डस्ट पोर्टल 2.0' को धरातल पर उतारने जा रही है, जिसके माध्यम से सभी निर्माण साइटों की चौबीसों घंटे लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। इस हाई-टेक सिस्टम में एआई (AI) कैमरों, पीएम 2.5 व पीएम 10 सेंसर और क्यूआर कोड तकनीक का समन्वय किया गया है। इससे न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोजेक्ट्स पकड़े जाएंगे, बल्कि फील्ड में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी पैनी नजर रखी जा सकेगी।
एआई कैमरों से होगी 24 घंटे लाइव मॉनिटरिंग, कोताही बरतने पर तुरंत एक्शन
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कागजी खानापूर्ति के बजाय सीधे जमीनी कार्रवाई होगी। सरकार का स्पष्ट मानना है कि प्रदूषण की निगरानी के पारंपरिक तरीके अब बेअसर हो चुके हैं, यही वजह है कि इस नए पोर्टल को पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस किया गया है। बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर लगे सेंसर और कैमरे हवा की गुणवत्ता का पल-पल का डेटा सीधे केंद्रीय कंट्रोल रूम को भेजेंगे। जैसे ही किसी साइट पर तय सीमा से अधिक धूल उड़ती दिखेगी, यह सिस्टम बिना किसी मानवीय दखल के तत्काल संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेज देगा। इसके अलावा, साइटों पर एंटी-स्मॉग गन, डस्ट नेट और पानी के नियमित छिड़काव जैसे जरूरी पुख्ता इंतजाम न मिलने पर तुरंत भारी जुर्माने और कानूनी नोटिस की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
क्यूआर कोड से रुकेगी फर्जी रिपोर्टिंग, त्रि-स्तरीय अलर्ट से शुरुआती स्तर पर ही लगेगी रोक
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस नई व्यवस्था की रूपरेखा रखते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे का विकास अपनी जगह है, लेकिन दिल्ली की जनता की सांसों की कीमत पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने माना कि कई कंपनियां नियमों को ताक पर रखकर काम करती हैं, जिससे निपटने के लिए अब हर रजिस्टर्ड निर्माण स्थल को एक 'यूनिक क्यूआर कोड' दिया जा रहा है। जांच अधिकारी मौके पर जाकर जैसे ही इस कोड को स्कैन करेंगे, उस साइट का पुराना इतिहास, पहले की गई कार्रवाई और नियमों के पालन का पूरा ब्यौरा उनके मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएगा, जिससे फर्जी रिपोर्टिंग और डेटा छिपाने के खेल पर पूरी तरह ताला लग जाएगा। इसके साथ ही एक त्रि-स्तरीय अलर्ट सिस्टम (येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट) भी बनाया गया है, जिसका मूल उद्देश्य प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पहले ही उसे शुरुआती चरण में रोकना है।
बारिश और तेज हवाओं से सुधरी आबोहवा, एनसीआर से हटीं ग्रैप-1 की पाबंदियां
तकनीकी कड़ाई के बीच दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए राहत की एक बड़ी खबर भी आई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने शुक्रवार को एक आधिकारिक आदेश जारी कर पूरे एनसीआर क्षेत्र में लागू ग्रैप-1 (Graded Response Action Plan) की पाबंदियों को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। पिछले दिनों हुई हल्की बूंदाबांदी और तेज हवाओं के चलते दिल्ली की फिजां में उल्लेखनीय सुधार देखा गया, जिसके चलते शुक्रवार शाम 4 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सुधरकर 123 रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले 19 मई को हवा बिगड़ने पर ग्रैप का पहला चरण लागू किया गया था। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी हवा 'मध्यम' श्रेणी में ही बनी रहेगी, हालांकि आयोग ने सभी संबंधित राज्यों को वर्तमान की बेहतर स्थिति को बरकरार रखने के लिए निरंतर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
