ST बसों में कैश की जगह UPI को तरजीह, भंडारा में डिजिटल भुगतान का कारोबार 23 करोड़ पार

भंडारा। महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल की बसों में सफर करने वाले आम यात्रियों के लिए टिकट भुगतान की प्रक्रिया अब बेहद आसान और डिजिटल हो गई है। सफर के दौरान अक्सर सामने आने वाली खुले पैसों या चिल्लर की किल्लत की समस्या से यात्रियों को निजात दिलाने के लिए भंडारा विभाग के अंतर्गत चलने वाली सभी एसटी बसों में एंड्रॉइड टिकट मशीनों पर क्यूआर कोड की सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके माध्यम से यात्री अब आसानी से यूपीआई का उपयोग करके अपने किराए का भुगतान कर पा रहे हैं।

डिजिटल भुगतान प्रणाली से बढ़ा कारोबार और नकद निर्भरता में कमी

इस आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से न केवल यात्रियों की नकद पर निर्भरता तेजी से घटी है, बल्कि बस के परिचालकों यानी कंडक्टर्स के लिए भी टिकटों का दैनिक हिसाब-किताब रखना काफी सरल हो गया है। इस अभिनव यूपीआई भुगतान सुविधा के आरंभ होने से लेकर अब तक विभाग के अंतर्गत कुल अठारह लाख नवासी हजार नौ सौ नब्बे डिजिटल लेनदेन दर्ज किए जा चुके हैं। इन सभी डिजिटल माध्यमों के जरिए कुल तेरह करोड़ इक्कीस लाख बासठ हजार तीन सौ रुपये का प्रभावशाली कारोबार दर्ज किया गया है, जो परिवहन निगम के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

विभिन्न डिपो में एंड्रॉइड मशीनों की उपलब्धता और यात्रियों का रुझान

भंडारा परिवहन विभाग के अंतर्गत आने वाले भंडारा, साकोली, तुमसर, पवनी, तिरोड़ा और गोंदिया समेत कुल छह प्रमुख डिपो की सभी बसों में यह यूपीआई भुगतान सेवा सुचारू रूप से कार्य कर रही है। इस पूरी व्यवस्था को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए विभाग द्वारा कुल आठ सौ छत्तीस आधुनिक एंड्रॉइड टिकट मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, निगम की कुल टिकट बिक्री का लगभग पंद्रह से बीस प्रतिशत हिस्सा अब सीधे यूपीआई के जरिए आ रहा है। अकेले कुछ चुनिंदा आंकड़ों के आधार पर एक लाख बीस हजार से अधिक टिकटों की बिक्री से एक करोड़ इकसठ लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो इस तकनीक की लोकप्रियता को दर्शाता है।

परिचालकों को राहत और वित्तीय लेन-देन में आई पारदर्शिता

डिजिटल टिकट भुगतान की इस सुविधा का लाभ केवल यात्रियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे बस परिचालकों के दैनिक कार्य का तनाव भी काफी हद तक कम हुआ है। दिनभर की नकदी संभालना, खुले पैसों की व्यवस्था करना और शाम को हिसाब का मिलान करने जैसी तमाम परेशानियों से अब मुक्ति मिल गई है। इसके अतिरिक्त, यूपीआई के माध्यम से भुगतान की राशि सीधे निगम के बैंक खाते में सुरक्षित पहुँचने से वित्तीय लेनदेन में अभूतपूर्व पारदर्शिता भी स्थापित हुई है।

दैनिक यात्रियों और विद्यार्थियों के लिए वरदान साबित हो रही सेवा

भंडारा के संभागीय यातायात नियंत्रक नीलेश बेलसरे ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बस में सफर करने वाला कोई भी यात्री टिकट लेते समय कंडक्टर के पास मौजूद मशीन पर प्रदर्शित क्यूआर कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करके चंद सेकंड में भुगतान कर सकता है। इससे जेब में नकद पैसे न होने पर भी यात्रा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती है। विशेष रूप से रोज सफर करने वाले दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं के लिए यह डिजिटल सुविधा बेहद मददगार साबित हो रही है।

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