आसाराम की पेरोल बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, आज ही जेल में करना होगा सरेंडर
![]()
जोधपुर। राजस्थान में नाबालिग से दुष्कर्म के संगीन मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने चिकित्सीय आधार पर आसाराम की पैरोल अवधि को आगे बढ़ाने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत के इस सख्त रुख के बाद अब आसाराम को आज शाम तक संबंधित जेल प्रशासन के समक्ष अनिवार्य रूप से सरेंडर करना होगा। गौरतलब है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने आसाराम को गत 6 अक्टूबर को बीस दिनों की अंतरिम पैरोल प्रदान की थी, जिसकी निर्धारित अवधि 26 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है। पैरोल पर बाहर आए आसाराम के वकीलों द्वारा पैरोल बढ़ाने की गुहार लगाई गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि जेल में आसाराम के स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखा जाए।
स्वास्थ्य कारणों का हवाला और सुप्रीम कोर्ट का सरेंडर करने का आदेश
उम्रकैद की सजा भुगत रहे आसाराम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर कर उनके गिरते स्वास्थ्य का हवाला दिया था। अदालत में दी गई अर्जी में कहा गया था कि आसाराम वर्तमान में उज्जैन स्थित गवर्नमेंट धन्वंतरि आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती हैं और उनका डॉक्टरी इलाज चल रहा है, इसलिए उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए पैरोल की अवधि को कुछ और समय के लिए बढ़ा दिया जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को पूरी तरह से ठुकराते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि पैरोल की मियाद पूरी होने के बाद पहले आत्मसमर्पण करना होगा, जिसके बाद ही उनकी किसी अन्य याचिका या अपील पर विचार किया जाएगा। इस आदेश के बाद आसाराम को शाम 5 बजे तक आत्मसमर्पण करना अनिवार्य हो गया है।
वर्ष 2013 के यौन उत्पीड़न मामले से जुड़ा घटनाक्रम
आसाराम को अगस्त 2013 में जोधपुर स्थित उनके आश्रम में एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अप्रैल 2018 में जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई थी। इसके बाद से ही वे जेल में बंद हैं और समय-समय पर खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर जमानत और पैरोल की मांग करते रहे हैं।
निचली अदालतों से लेकर शीर्ष अदालत तक कानूनी लड़ाइयों का दौर
आसाराम के कानूनी सफर में लगातार उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। पूर्व में भी उन्हें चिकित्सीय आधार पर कुछ समय के लिए अंतरिम जमानत और पैरोल की राहतें मिलती रही हैं। हालांकि, राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था। हाल ही में 6 अक्टूबर को उच्च न्यायालय से मिली बीस दिनों की पैरोल की समय-सीमा 26 अक्टूबर को पूरी होने के बाद, अब उन्हें कानून की प्रक्रियाओं का पालन करते हुए वापस जेल की सलाखों के पीछे जाना होगा।
