MP में बर्ड फ्लू का खौफ

शिवराज ने आला अफसरों की आपात बैठक बुलाई, दक्षिण के राज्यों से पोल्ट्री के व्यापार पर अस्थाई रोक

मध्य प्रदेश में पोल्ट्री फार्म के पक्षियों के सैंपल भी लिए जाएंगे, केंद्र ने स्थिति पर नजर रखने के लिए बनाया कंट्रोल रूम

बर्ड फ्लू को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को आला अफसरों की बैठक बुलाई। बैठक में फैसला लिया गया कि दक्षिण भारत के कुछ राज्यों से सीमित अवधि के लिए पोल्ट्री का व्यापार प्रतिबंधित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अस्थाई रोक एहतियातन लगाई गई है। प्रदेश के तीन स्थान इंदौर,आगर-मालवा और मंदसौर में कुछ कौवों की मौत के बाद सावधानी के तौर पर ये उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में ऐसी समस्या नहीं है, ऐहतियातन जरूरी कदम उठाए गए हैं।

बैठक में केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन को लेकर भी चर्चा हुई। स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर जिलों में गाइडलाइन का पालन करवाने के निर्देश जारी करेगा। इसके साथ ही पशुपालन विभाग और सहयोगी एजेंसियों को इस मामले में सजग रहने, रैंडम चैट करने और लोगों को आवश्यक जानकारी देने का निर्देश है। बैठक में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

स्वास्थ्य विभाग के एक अफसर ने बताया कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और केरल में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद केंद्र सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग ने रोज जानकारी लेने के लिए दिल्ली में एक कंट्रोल रूम बनाया है।

11 दिन में 376 कौवों की मौत
मध्यप्रदेश में 23 दिसंबर से 3 जनवरी 2021 तक इंदौर में 142, मंदसौर में 100, आगर-मालवा में 112, खरगोन जिले में 13 और सीहोर में नौ कौवों की मौत हुई है। मृत कौवों के नमूने तुरंत भोपाल स्थित स्टेट डीआई लैब भेजे जा रहे हैं।

पशुपालन विभाग के अधिकारियों को खास निर्देश
जिलों में तैनात पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश हैं कि कौवों की मौत की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और अन्य विभागों के समन्वय से तुरंत नियंत्रण और शमन की कार्यवाही कर रिपोर्ट भेजें। पोल्ट्री और पोल्ट्री प्रोडक्ट्स मार्केट, फार्म, तालाब और प्रवासी पक्षियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। प्रवासी पक्षियों के नमूने भोपाल लैब को भेजें।

‘अभी तक मुर्गियों में कौवों वाला वायरस नहीं मिला’
पशुपालन मंत्री प्रेम सिंह पटेल ने कहा कि नियंत्रण कार्य में लगे अमले को पीपीई किट, एंटी वायरल ड्रग, मृत पक्षियों, संक्रमित सामग्री, आहार का डिस्पोजल और डिसइन्फेक्शन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कौवों में पाया जाने वाला वायरस एच5एन8 अभी तक मुर्गियों में नहीं मिला। मुर्गियों में पाया जाने वाला वायरस एच5एन1 होता है। लोगों से अपील है कि पक्षियों की मौत की सूचना तुरंत स्थानीय पशु चिकित्सा संस्था या पशु चिकित्सा अधिकारी को दें।

Leave a Reply